
चल भगता दर माँ दे चलिये
चल भगता दर माँ दे चलिये, आ गिया अशु दे महीने रुता प्यारियाँ, वाण गंगा दा ठंडा पानी वाण गंगा

चल भगता दर माँ दे चलिये, आ गिया अशु दे महीने रुता प्यारियाँ, वाण गंगा दा ठंडा पानी वाण गंगा

लाज रखो मोरी लाज रखो मैं मंगता तोहरा कहलता, तुझसे कर्म की आस बनी है, दुखियो की फरयाद सुनी है,

जिसने लिखी अपने हाथो से दुनिया की तकदीर शिर्डी में वो आया देखो बनके एक फ़कीर शिर्डी साईं द्वारका माई

जन्मे जन्मे कृष्ण मुरार खुशियाँ ही खुशियाँ छाई सब देते आज वधाई जन्मे जन्मे कृष्ण मुरार सारे जग में मच

मैं भीख माँग रया हा ओ बाबा थारे द्वार, जनम जनम का काट के बंधन, कर दो भव से पार

तर्ज – तेरे जैसा यार कहाँ…. बाबोसा का द्वार जहाँ , वहाँ मेरा आशियाना मुझे दरबार मिला ,करू तेरा शुकराना

मेरा क्या है कसूर तू बता संवारे मुझे अपने से क्यों किया दूर संवारे, नरसी का तूने भात भरा संवारे

श्यामा जो मेरी नैया उस पार लगा देना, अब तक तो निभाई है आगे भी निभा देना, दल बल के

आगई चलके हवाए तेरे दीवाने तक, अब येही लेके चले गी मुझे बरसाने तक, आगई चलके हवाए ……. तुझको मैं

विघ्नहरण मंगल करन गौरी सुत गणराज मैं लियो आसरो आपको तो प्रभु रख्यो माहरी लाज म्हारे घर