
भक्त सिलपिल्ले बाई जी
कृष्ण जी की सच्ची भक्त सिलपिल्ले बाई की कथा भगवान और भक्त का रिश्ता एक प्रेम का रिश्ता होता है

कृष्ण जी की सच्ची भक्त सिलपिल्ले बाई की कथा भगवान और भक्त का रिश्ता एक प्रेम का रिश्ता होता है

भगवान् शिव का लोकमंगल रूप एक समय की बात है, देवों और दानवों ने अमृत पाने की इच्छा

भगवान जगन्नाथ के नेत्र क्यों इतने विशाल हैं? क्यों वे कभी नहीं झपकते?पढ़िए, यह दुर्लभ कथा जब एक टूटा हुआ
राजा दशरथ के दरबार में जब विश्वामित्र ऋषि ने आकर कहा कि ’महाराज मेरे यज्ञ में राक्षस विघ्न करते हैं,

एकनाथ महाराज के पास एक वैष्णव आया। उसने महाराज को पूछा कि आपका मन ईश्वर में,सदासर्वदा श्रीकृष्ण में कैसे स्थिर

जीवन में कभी कभी आप गोपाल जी की कृपा से उनके अदभूत भक्तों से मिल जाते है ! ऐसा ही

एक अत्यंत रोचक घटना है, माँ महालक्ष्मी की खोज में भगवान विष्णु जब भूलोक पर आए, तब यह

बोध_कथा सत्य के तीन पहलु भगवान बुद्ध के पास एक व्यक्ति पहुँचा। बिहार के श्रावस्ती नगर में उन दिनों उनका

एक भक्त भगवान से अन्तर्मन से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे परमात्मा मेरे सब कुछ आप ही है आप

ॐ श्रीरामजयम्। ॐ भूमिपुत्र्यै च विद्महे, रामपत्न्यै च धीमहि। तन्नः सीता प्रचोदयात्।। सीता श्रीरामसज्जाया सानन्दवाक्स्वरूपिणी।सा सम्पूर्णसुमाङ्गल्या ज्वलदग्निशुचिस्फुरा।।१।। मदम्बा श्रीमहालक्ष्मीर्मच्चित्तविलसत्प्रभा।क्षमागुण्यातिसान्त्वा मा