
मन की सुंदरता
एक बार एक सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का एकादशी का व्रत था तो पंडित

एक बार एक सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का एकादशी का व्रत था तो पंडित

सीया-रघुवर जी की आरती, शुभ आरती कीजिये -२ सीस मुकुट काने कुण्डल शोभे -२ राम लखन सीय जानकी, शुभ आरती

ज्येष्ठा कृष्ण एकादशी… युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन! ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का क्या नाम है, तथा उसका माहात्म्य क्या

भगवान का चिन्तन, मनन, सिमरण, स्मरण करते हुए भक्त को सबकुछ प्रभु रूप दिखने लगता है। भक्त को अपने अन्तर्मन

पंचमुखी हनुमान में है भगवान शंकर के पांच अवतारों की शक्ति! शंकरजी के पांचमुख—तत्पुरुष, सद्योजात, वामदेव, अघोर व ईशान हैं;

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशंविश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥ शांति पाठ ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।पूर्णस्य पूर्णमादाय

*हे नाथ! पुत्र, मित्र, गृह, आदि से घिरे हुए संसार-सागर से आप ही मेरी रक्षा करते हैं। आप ही शरणागत

प्रार्थना उसी की सार्थक है जो आत्मा को परमात्मा में घुला देने के लिए व्याकुलता लिए हुए हो। जो अपने

पाट पीताम्बर ओढ़े नीली साड़ी सीस के सिंदूर जाऊं बलिहारी पाट पीताम्बर ओढ़े नीली साड़ी माथे के सिंदूर जाऊं बलिहारी

हे प्रभु हे स्वामी भगवान नाथ मै तुम्हे शिश नवाकर अन्तर्मन से प्रणाम और वन्दन करती हूँ। एक भक्त को