
हे शिव आपको हमारा बारम्बार प्रणाम हे
हे शिव आपको हमारा बारम्बार प्रणाम हे महादेव हे करूणानिधान हे शुलपाणी हे कल्याणकारी आपको बारम्बार प्रणाम आपको बारम्बार ।हे

हे शिव आपको हमारा बारम्बार प्रणाम हे महादेव हे करूणानिधान हे शुलपाणी हे कल्याणकारी आपको बारम्बार प्रणाम आपको बारम्बार ।हे

।। जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता। गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता प्रिय कंता।। पालन सुर धरनी अद्भुत

।। ।। ॐ कृपासमुद्रं सुमुखं त्रिनेत्रंजटाधरं पार्वतीवामभागम्।सदाशिवं रुद्रमनन्तरूपंचिदम्बरेशं हृदि भावयामि।।१।। वाचामतीतं फणिभूषणाङ्गंगणेशतातं धनदस्य मित्रम्।कन्दर्पनाशं कमलोत्पलाक्षंचिदम्बरेशं हृदि भावयामि।।२।। रमेशवन्द्यं रजताद्रिनाथंश्रीवामदेवं भवदुःखनाशम्।रक्षाकरं

माणिक्यं ततो रावणनीतायाः सीतायाः शत्रुकर्शनः। इयेष पदमन्वेष्टुं चारणाचरिते पथि।। (यह सुन्दरकाण्ड का पहला श्लोक है, रत्न- माणिक, ग्रह- सूर्य) तब

पंचांग के अनुसार, हर एक दिन किसी न किसी देवी- देवता को समर्पित है। इसी तरह रविवार का दिन भगवान

नमस्ते भगवान देव, लोकनाथ जगतपते।क्षीरोदवासिनं देवं शेषभोगानुशायिनम्।। हे भगवान देव, हे जगत के स्वामी, हे क्षीर समुद्र में वास करने

।। जय श्रीहरि ।। मन कभी भी ख़ाली नहीं बैठ सकता, कुछ ना कुछ करना इसका स्वभाव है। अच्छा काम

!! जय श्री कृष्णा राधे राधे!! “छोटा बने सो हरि पावै”भगवान श्री कृष्ण जी ने छोटी उंगली पर ही क्यों
रामशरण जी और दयाशंकर बचपन के दोस्त थे। कृष्ण सुदामा जैसी दोस्ती थी उनकी।रामशरण जी बहुत बड़े जमींदार,कई कारखाने,जमीन के

वृंदावन की गली में एक छोटा सा मगर साफ़ सुथरा,सजा संवरा घर था। एक गोपी माखन निकाल रही है और