
नीलचक्र ,जगन्नाथ मंदिर ,पुरी
मंदिर के शिखर के ऊपर अष्टधातु में बना एक विशाल चक्र है जिसे नील चक्र अथवा श्री चक्र कहते हैं।

मंदिर के शिखर के ऊपर अष्टधातु में बना एक विशाल चक्र है जिसे नील चक्र अथवा श्री चक्र कहते हैं।

यही वह महाँन मंत्र है!जिसका जप करके बालक ध्रुव ने सच्चिदानन्द ब्रह्म को दर्शन देने पर विवश कर दिया! यह

वामन अवतार और राजाबलि के दान की कथा। कथा विस्तार से है मेरा निवेदन है कि कथा पूरी पढ़े। इस

, जय महाकाल, हर महादेव, ॐ नमः शिवाय , जय भोले नाथ , ॐ नमः शिवाय, रूप हूं,, विशाल हूं,,रुद्र

।। श्री रामाय नमः ।।एक दिन जब श्रीरघुनाथ जी एकांत में ध्यानमग्न थे, प्रियभाषिणी श्री कौसल्या जी ने उन्हें साक्षात्

यह महालक्ष्मी हृदय स्तोत्र का प्रभावशाली लघुरुप है। भगवती महालक्ष्मी के पूजन में लक्ष्मी का आवाहन करने हेतु इसे पढ़ें।

🌹 जय श्री श्याम जी 🌹 ☆श्री खाटूश्याम वंदना☆ “हाथ जोड़कर विनति करूसुनियो चित्त लगाये,दास आ गयो शरण मेराखियो इसकी

हनुमानञ्जनासूनुर्वायुपुत्रो महाबल:।रामेष्ट: फलगुनसख: पिङ्गाक्षोऽमितविक्रम:।। उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन:।लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।। एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:।स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।।

जय कामेशि चामुण्डे जय भूतापहारिणि।जय सर्वगते देवि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते।। विश्वमूर्ते शुभे शुद्धे विरुपाक्षि त्रिलोचने।भीमरुपे शिवे विद्ये कामेश्वरि नमोऽस्तु ते।।

।। ।। ओङ्कारार्णवमध्यगे त्रिपथगे ओङ्कारबीजात्मिकेओङ्कारेण सुखप्रदे शुभकरे ओकारबिन्दुप्रिये।ओङ्कारे जगदम्बिके शशिकले ओङ्कारपीठस्थितेदासोऽहं तव पादपद्मयुगलं वन्देऽखिलाण्डेश्वरि।।१।। ह्रीङ्कारार्णववर्णमध्यनिलये ह्रीङ्कारवर्णात्मिकेह्रीङ्काराब्धिसुचारुचान्द्रकधरे ह्रीङ्कारनादप्रिये।ह्रीङ्कारे त्रिपुरेश्वरी सुचरिते ह्रीङ्कारपीठस्थितेदासोऽहं