
गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र
हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद गीता’ के तीसरे अध्याय में गजेंद्र स्तोत्र पढ़ने को मिलता है। इसमें कुल ३३

हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद गीता’ के तीसरे अध्याय में गजेंद्र स्तोत्र पढ़ने को मिलता है। इसमें कुल ३३

।। नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे।विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नमः।।१।। नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे।कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नमः।।२।। नमः कमलनेत्राय नमः कमलमालिने।नमः कमलनाभाय
राजा लोग पहले कमर कसते हैं, माने अपने बल का प्रदर्शन करते हैं, फिर उठते हैं, तब व्याकुल होकर अपने

एक दिन संध्या के समय सरयू के तट पर तीनों भाइयों संग टहलते श्रीराम से महात्मा भरत ने कहा, “एक

जब श्रीराम जी का राज्याभिषेक हुआ, तब एक दिन श्रीराम ने श्रीभरत जी को उलाहना दिया, “तुम इतने उदार और

द्रौपदी महाभारत के सबसे प्रसिद्ध पात्रों में से एक है। इस महाकाव्य के अनुसार द्रौपदी पांचाल देश के राजा द्रुपद

अयोध्या आगमन के बाद राम ने कई वर्षों तक अयोध्या का राजपाट संभाला और इसके बाद गुरु वशिष्ठ व ब्रह्मा

नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पेनमस्ते जगद्व्यापिके विश्वरूपे।नमस्ते जगद्वन्द्यपादारविन्देनमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।। नमस्ते जगच्चिन्त्यमानस्वरूपेनमस्ते महायोगिनि ज्ञानरूपे।नमस्ते नमस्ते सदानन्दरूपेनमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।। अनाथस्य

हे स्वामिनी राधे, कब ऐसी घड़ी आएगी,जब मैं आपके श्री चरणों की सेवा का सौभाग्य पाऊंगी , आप सिंघासन पर

।। नमो राघवाय ।। र’, ‘अ’ और ‘म’, इन तीनों अक्षरों के योग से ‘राम’ मंत्र बनता है। यही राम