
हनुमान जी वन्दना
ॐ वन्दे सन्तं श्रीहनुमन्तं रामदासममलं बलवन्तम् । ।रामकथामृतमधु निपिबन्तं परमप्रेमभरेण नटन्तम् ।। प्रेमरुद्ध गलमश्रुवहन्तं पुलकाश्चित वपुषा विलसन्तम् । सर्वं राममयं

ॐ वन्दे सन्तं श्रीहनुमन्तं रामदासममलं बलवन्तम् । ।रामकथामृतमधु निपिबन्तं परमप्रेमभरेण नटन्तम् ।। प्रेमरुद्ध गलमश्रुवहन्तं पुलकाश्चित वपुषा विलसन्तम् । सर्वं राममयं

“प्रार्थना “ मंत्र में , प्रार्थनाओं में अद्भुत शक्ति होती है । ‘प्रार्थना ‘ जीवन की आस है, विश्वास है

ब्रह्माजी बोले :–हे नारद ! जब यह समाचार गुणनिधि को मिला तो उसे अपने भविष्य की चिंता हुई। वह कई

मैं अपने निवास स्थान योगेश भवन से निकलकर नजदीक ही स्थित भंवरताल पार्क की ओर जाने लगा। मेरी वह चाल

ॐ नमस्ते गणपतये।त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।। त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।त्वमेव केवलं धर्तासि।। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।। त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।ऋतं वच्मि।

एक मक्खी एक हाथी के ऊपर बैठ गयी हाथी को पता न चला मक्खी कब बैठी। मक्खी बहुत भिनभिनाई आवाज

हे प्रभो,हे विश्वम्भर,हे दीनदयाल ,हे कृपा सिन्धु,हे सर्वशक्तिमान,आपको प्रणाम है प्रणाम है,प्रणाम है।हे प्रभु न मै योग जानता हुँ,न ज्ञान

मैंने सुना है, एक सूफी फकीर के आश्रम में प्रविष्ट होने के लिये चार स्त्रियां पहुंचीं। उनकी बड़ी जिद थी,

।। श्री: कृपा ।।🌿 पूज्य “सद्गुरुदेव” जी ने कहा – सफलता की प्राप्ति के लिए ज्ञान, पुरुषार्थ के अतिरिक्त सही

. बूढी मां और लाचार बाप को बिलखता छोड़कर एक ऋषि तपस्या करने के लिए वन में चले गए !