
।। श्रीविश्वनाथस्तोत्रम् ।।
उपहरणं विभवानां संहरणं सकलदुरितजालस्य।उद्धरणं संसाराच्चरणं वः श्रेयसेऽस्तु विश्वपतेः।। भिक्षुकोऽपि सकलेप्सितदाता प्रेतभूमिनिलयोऽपि पवित्र:।भूतमित्रमपि योऽभयसत्री तं विचित्रचरितं शिवमीडे।। अर्थ-समस्त ऐश्वर्यो को प्रदान

उपहरणं विभवानां संहरणं सकलदुरितजालस्य।उद्धरणं संसाराच्चरणं वः श्रेयसेऽस्तु विश्वपतेः।। भिक्षुकोऽपि सकलेप्सितदाता प्रेतभूमिनिलयोऽपि पवित्र:।भूतमित्रमपि योऽभयसत्री तं विचित्रचरितं शिवमीडे।। अर्थ-समस्त ऐश्वर्यो को प्रदान

दरिद्रता और ऋण के भार से दु:खी व संसार की पीड़ा से व्यथित मनुष्यों के लिए प्रदोष पूजा व व्रत

।। ॐकारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिनः।कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः।।१।। नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणाः।नरा नमंति देवेशं नकाराय नमो

ऐसी बात नहीं है कि अवधपुरी में राजा दशरथ के घर श्रीराम अवतरित हुए तब से ही लोग श्रीराम का

प्रार्थना *हे जगत के आधार! हे ब्रह्मा!हे विष्णु! हे परमसत्ता शिव!आप हम पर अनंत-अनंत कृपा बरसाते हो! हम पात्र हो

श्याम बाबा की कहानी महाभारत काल से संबंधित है। श्याम बाबा(बर्बरीक) भीम और हिडिम्बा के पौत्र थे। उनके पिता का
एक बार एक राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवो में घूम रहा था, पुराने जमाने में राजा

बहुत समय पहले की बात है, एक बार भारत सरकार ने बाँध बनाने का काम इंग्लैंड की कम्पनी को दिया

।। नमो राघवाय ।। र’, ‘अ’ और ‘म’, इन तीनों अक्षरों के योग से ‘राम’ मंत्र बनता है। यही राम

।। ।। नित्यानंदकरी वराभयकरी सौंदर्य रत्नाकरीनिर्धूताखिल घोर पावनकरी प्रत्यक्ष माहेश्वरी।प्रालेयाचल वंश पावनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलंबनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।। नाना रत्न विचित्र भूषणकरि