
श्रीमद्भगवद्गीता में प्रभु ने कहा
श्रीमद्भगवद्गीता में प्रभु ने कहा है “वृष्णिनां वासुदेवोऽस्मि” यादवों में मैं वासुदेव हूँ |ॐ कृष्णऺ वंदे जगद्गुरूम् ॐ“कौन्तेय प्रतिजानीहि न

श्रीमद्भगवद्गीता में प्रभु ने कहा है “वृष्णिनां वासुदेवोऽस्मि” यादवों में मैं वासुदेव हूँ |ॐ कृष्णऺ वंदे जगद्गुरूम् ॐ“कौन्तेय प्रतिजानीहि न

राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण सुनातें हुए जब शुकदेव जी महाराज को छह दिन बीत गए और तक्षक ( सर्प

1 बालकाण्ड –बालक प्रभु को प्रिय है क्योकि उसमेँ छल , कपट , नही होता विद्या , धन एवं प्रतिष्ठा

ऋषि अगस्त्य के जन्म की कथा एक बार एक समय पर मित्र (सूर्य) और वरुण (बारिश का देवता) अप्सरा उर्वशी

कितना अजीब है ना दिसंबर और जनवरी का रिश्ता?जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा…दोनों काफ़ी नाज़ुक है दोनो

। सुंदरकांड में 1 से 26 तक जो दोहे हैं, उनमें शिवजी का अवगाहन है, शिवजी का गायन है, वो

1.हे मेरे स्वामी.मेरी इच्छा कभी पूर्ण न हो सदैव आपकी ही इच्छा पूर्ण हो.क्योंकि मेरे लिए क्या सही है ये

जननी,जनक,बन्धु,सुत,दारा…..तन,धन,भवन, सुह्रद,परिवारा…..सबके ममता ताग बटोरी…मम पद मनहि बाँधि बर डोरि….. क्रमशः से आगे……..सन्त जन कहते है कि शरीर के पति

गायत्री सद्बुद्धि का मंत्र है। इस महामंत्र में कुछ ऐसी विलक्षण शक्ति है कि उपासना करने वाले के मस्तिष्क और

पदम पुराण के अनुसार जो घर राधा रानी के चरण-चिन्हों से विभूषित होगा वहां भगवान नारायण (भगवान श्री कृष्ण) संपूर्ण