
समर्पण भाव की जागृति 2
आज प्रभु प्राण नाथ हृदय में आये हैं। हे मेरे स्वामी जैसे तुम इस दिल में समाए हो वैसे ही

आज प्रभु प्राण नाथ हृदय में आये हैं। हे मेरे स्वामी जैसे तुम इस दिल में समाए हो वैसे ही

सतयुग की बात है. एक समय में भद्राश्व नामक महान राजा हुआ करते थे. भद्राश्व इतने शक्तिशाली राजा थे कि

एक गृहस्थ भक्त अपनी जीविका का आधा भाग घर में दो दिन के खर्च के लिए पत्नी को देकर अपने

हे माधव! हे मेरे सार सर्वस्व ! हे आनंदघन ! हे करुणामूर्ति !जैसे आपने सारे बृजवासियों को इंद्र के प्रकोप

कथा पढ़ने या सुनने से ही माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है, कभी धन की कमी नहीं रहती..एक गांव में साहूकार

गत पोस्ट से आगे ……….यम और यमदूतों का संवादश्रीशुकदेवजी कहते हैं – जब दूतों ने इस प्रकार प्रश्न किया, तब

अगर कभी पढ़ो और समझो तो आंसुओ पे काबू रखना……. रामायण का एक छोटा सा वृतांत है, उसी से शायद

गत पोस्ट से आगे………..विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म – निरूपण औरअजामिल का परमधामगमन श्रीशुकदेवजी कहते हैं – परीक्षित ! उन भगवान के

गत पोस्ट से आगे………..विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म – निरूपण औरअजामिल का परमधामगमन मैंने जो अभी अद्भुत दृश्य देखा, क्या वह स्वप्न

गत पोस्ट से आगे………विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म – निरूपण औरअजामिल का परमधामगमन यमदूतो ! जैसे जान या अनजान में ईंधन अग्नि