
ब्रज वृन्दावन धाम
परमात्मा या परमात्मा के भेजे गए पार्षद जन्म से ही दिव्य एवं अलौकिक हुआ करते हैं उनकी दिव्यता अलौकिकता आरम्भ

परमात्मा या परमात्मा के भेजे गए पार्षद जन्म से ही दिव्य एवं अलौकिक हुआ करते हैं उनकी दिव्यता अलौकिकता आरम्भ

एक व्यक्ति बहुत परेशान था।उसके दोस्त ने उसे सलाह दी कि कृष्ण भगवान की पूजा शुरू कर दो।उसने एक कृष्ण

भगवान का नाम भजते रहो भगवान से प्रार्थना करते रहो मेरे प्रभु मेरे स्वामी मेरे भगवान हे बिहारी जी इस

भक्त भगवान का चिन्तन मनन करते हुए भगवान का बन जाना चाहता है। अपने इष्ट का ध्यान करना अपने भगवान

एक बार की बात है, वृन्दावन में एक संत रहा करते थे. उनका नाम था कल्याण. बाँके बिहारी जी के

वह आदमी भगवानका इंतज़ार करता है, क्योकि उसे अपने जीवन में भगवान के दर्शन प्राप्त करने थे मगर यह सभी जानते

.एक व्यक्ति की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नि के साथ वापिस आ रहे थे !.रास्ते में वो

एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी

ठाकुर जी के हस्ताक्षर जो भक्त का रूप धारण कर के न्यायालय में किये , आज भी उसकी प्रतिलिपि भगत

प्रार्थना केवल शब्दों के समूह का नाम नहीं है अपितु प्रार्थना एक भाव दशा का नाम है। प्रार्थना शब्दों से