
84 लाख योनियों से मुक्ति कथा
*एक बार की बात है कियशोदा मैया, प्रभु श्री कृष्ण के उलाहनों से तंग आ गयीं! और छड़ी लेकर श्री

*एक बार की बात है कियशोदा मैया, प्रभु श्री कृष्ण के उलाहनों से तंग आ गयीं! और छड़ी लेकर श्री

तुलसीदास एक महान हिंदू संत और कवि थे। वह महान हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस के लेखक भी थे। तुलसीदास जयंती पारंपरिक

पृथ्वी पर तीन ही “रत्न” हैं। “जल”, “अन्न” और “सुभाषित” (मीठी बोली)। मूर्ख लोग पत्थर के टुकड़ों, हीरे, मोती, माणिक्य

॥ दोहा ॥ बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥ जय मनमोहन मदन

“नागपंचमी” कथा प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। एक दिन पीली

हमे पहले परम पिता परमात्मा का बनना होगा। परमात्मा से प्रेम करना होगा। एक ही भगवान पर विस्वास करना होगा।

पता नहीं ये सामने वाला सेठ हफ्ते में 3-4 बार अपनी चप्पल कैसे तोड़ लाता है?” मोची बुदबुदाया,नजर सामने की

मेरे भगवान नाथ मेरे स्वामी हे प्राण नाथ क्या मिलन भी होगा या ये जीवन ऐसे ही बह जाऐगा। हे

हम नमस्कार करते हैं तब हाथ जोड़कर शिश नवा कर नतमस्तक होते हैं नमस्कार में दो हाथ दस ऊंगलियां एक

परमात्मा को दिल में बिठा ले। हे प्रभु हे स्वामी हे भगवान् नाथ आज ये दिल तुमसे मिलने के लिए