
श्रीमदभागवतमहापुराण में भगवन्नाम महिमा ( पोस्ट 11 )
गत पोस्ट से आगे………विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म – निरूपण औरअजामिल का परमधामगमन यमदूतो ! जैसे जान या अनजान में ईंधन अग्नि

गत पोस्ट से आगे………विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म – निरूपण औरअजामिल का परमधामगमन यमदूतो ! जैसे जान या अनजान में ईंधन अग्नि

भक्ति-मार्ग की आचार्य गोपियाँ है. उनका आदर्श मन और आँखों के सामने रखो.ज्ञानमार्ग से योगमार्ग से जिस ईश्वर का आनंद

घर में रहकर भी श्रीभगवान का दर्शन हो सकता है। गोपियों को घर में ही भगवान के दर्शन हुए है।गोपियाँ

कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इसे अहोई आठे के नाम से

श्री हरि: गत पोस्ट से आगे……….. विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म – निरूपण औरअजामिल का परमधाम गमन बड़े-बड़े ब्रह्मवादी ऋषियों ने पापों

एक सुंदर प्रसंग हरीराम बनारस में गुलाब की पत्तियों को पीसकर गुलकंद बनाने का काम करता था ।बनारस में उसकी

श्री हरि: – गत पोस्ट से आगे……….. विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म – निरूपण औरअजामिल का परमधामगमन श्रीशुकदेवजी कहते हैं – परीक्षित

मेरा परम पिता परमात्मा मेंरा जगत जगदीश प्रकाश का पूंज है।जिसमें सम्पूर्ण जगत समाया हुआ है।परम पिता परमात्मा कोई शरीर

वेद त्याग का उपदेश करते हैं . शास्त्र सब कुछ छोड़ने का कहते हैं।शास्त्र तो कहते हैं,”काम छोडो,क्रोध छोड़ो। परन्तु

ईश्वर जगत में किसी एक स्थान में है यह ज्ञान भी अपूर्ण है।ईश्वर सर्व व्यापक है, यह एक मूर्ति में