
श्रीअग्रदेवजी महाराज के शिष्य नाभा दास जी
भक्तमाल ग्रन्थ रचना जानकी जी की प्रधान सखी चन्द्रकला जी ही आचार्य स्वामी श्रीअग्रदेवजी महाराज के रूप में प्रकट हुई

भक्तमाल ग्रन्थ रचना जानकी जी की प्रधान सखी चन्द्रकला जी ही आचार्य स्वामी श्रीअग्रदेवजी महाराज के रूप में प्रकट हुई
सत्त्वगुणसम्पन्न जीव साधना में उन्नति करते-करते जब इस दशा पर पहुँच जाते हैं कि श्रीभगवद्दर्शन के बिना उन्हें चैन नहीं

महात्मा बुद्ध का अंतिम दिन था। वह शांत और स्थिर थे, जैसे स्वयं मृत्यु का भी स्वागत कर रहे हों,

महर्षि वेदव्यासकृत ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणपति खण्ड में श्री गणेश जी के अद्भुत चरित्र का वर्णन है।(उस अद्भुत चरित्र के

मैंने सुना है, अकबर ने तानसेन को एक बार कहा कि तुम्हारा संगीत अपूर्व है। मैं सोच भी नहीं सकता

रमता जोगी ने प्रश्न किया गुरु महाराज ये सतयुग क्या हैं और कब तक आयेगा तो मैने रमता को समझाया

अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट रघु ने ही ‘रघुकुल’ या ‘रघुवंश’ की नींव रखी थी। रघुकुल अपने सत्य, तप, मर्यादा, वचन
जब प्रेम सच्चा हो, तो भगवान स्वयं वस्त्र पहनने आते हैं। त्रिपुरदास जी ब्रजभूमि के शेरगढ़ में एक राजा के
एक समय की बात है गुरु और शिष्य किसी गांव से गुजर रहे थे थोड़ी दूर चलने पर गुरू जी

पूछा है कि हम कैसे हो जाएं कि परमात्मा प्रगट हो सके?एक छोटी सी कहानी अंत में कह देनी है।