
परदुःखकातरता
परदुःखकातरता संयुक्त राज्य अमेरिकाके एक प्रेसीडेंट एक बार राजसभामें जा रहे थे। रास्तेमें उन्होंने एक सूअरको कीचड़ में धँसे देखा।

परदुःखकातरता संयुक्त राज्य अमेरिकाके एक प्रेसीडेंट एक बार राजसभामें जा रहे थे। रास्तेमें उन्होंने एक सूअरको कीचड़ में धँसे देखा।

एक नास्तिककी भक्ति हरिराम नामक एक आदमी शहरकी एक छोटी-सी गली में रहता था। वह एक मेडिकल स्टोरका मालिक था।

कामदेवमें कितना बल एक गाँवमें एक पण्डितजी कथा बाँचा करते थे। कथा समाप्त होनेपर वे कहा करते- ‘कामदेवमें दस हजार

‘गाड़ी आनेमें केवल आधा घंटा रह गया है। लकड़ीके पुलपर गाड़ी गिर पड़ेगी और अगणित प्राणियोंके प्राण चले जायँगे बेटी!’

प्रभु-प्राप्तिका मार्ग द्वितीय सिक्खगुरु अंगददेवजीका पूर्वनाम लहिणा था। तीर्थयात्रा करते समय एक बार उनकी मुलाकात आदिगुरु नानकदेवसे हुई और उनके

प्रेम ही ईश्वर है सरल विश्वास और निष्कपटता रहनेसे भगवत्प्राप्तिका लाभ होता है। एक व्यक्तिकी किसी साधुसे भेंट हुई। उसने

एक शराबीको नशेमें चूर लड़खड़ाते पैर चलते देखकर संत हुसेनने कहा- ‘भैया! पैर सँभाल-सँभालकर रखो, नहीं तो गिर जाओगे।’ शराबीने

स्काटलैंडके एक सरदार सर राबर्ट इसपर एक समय बड़ा संकट आ गया और वह बड़ी विपत्तिमें पड़ गया। अन्य लोगोंकी

किसीके पीछे मत भागो एक बार सर्दियोंकी दोपहरमें स्वामी रामतीर्थ घूमने निकले। रास्तेमें उन्होंने देखा कि एक बच्चा अपनी परछाईंको

भगवान् बुद्धके जीवनकी घटना है। तथागत छप्पन सालके थे। अभीतक अपनी परिचर्याके लिये किसी उपस्थाक (परिचारक) – की नियुक्तिकी आज्ञा