
श्रमका फल
अब्राहम लिंकनका बचपन अत्यन्त दुःखमय था । उन्होंने अत्यन्त साधारण और गरीब परिवारमें जन्म लिया था। कभी नाव चलाकर तो

अब्राहम लिंकनका बचपन अत्यन्त दुःखमय था । उन्होंने अत्यन्त साधारण और गरीब परिवारमें जन्म लिया था। कभी नाव चलाकर तो

भक्तशिरोमणि कविवर रामप्रसाद सेनने अपने जीवनकालमें ही देवी उमाका साक्षात्कार किया था। इतनी थी उनकी प्रगाढ भक्ति एवं भगवतीके चरणोंकी

सोये हुए शत्रुको मारना महापाप पाण्डवोंका धृतराष्ट्रके पुत्रोंके साथ महाभारत नामक प्रसिद्ध युद्ध हुआ। अनेक अक्षौहिणी सेनाओंसे युक्त उस महायुद्धमें

एक ग्रामीण बैलगाड़ी लिये कहीं जा रहा था। एक नालेके कीचड़में उसकी गाड़ीके पहिये धँस गये। ग्रामीण बैलगाड़ीसे उतर पड़ा

मनुष्य कैसा भी हो, उसमें कुछ-न-कुछ दुर्बलता भी होती ही है। देवप्रिय सम्राट् अशोकमें अपार सद्गुण थे; साथ ही एक

महात्मा ईसामसीहके सम्मुख एक नारी पकड़कर से आयी गयी थी। नगरके लोगोंकी भीड़ उसे घेरे हुए थी। लोग अत्यन्त उत्तेजित

सद्गुरु बच्चा अगर तुम शिष्य बननेको तैयार हुए, तो सारा संसार तुम्हें सद्गुरुओंसे भरा हुआ दिखायी पड़ेगा। वृक्ष, चट्टानें और

एक व्याधने पक्षियोंको फँसानेके लिये अपना जाल बिछाया ! उसके जालमें दो पक्षी फँसे; किंतु उन पक्षियोंने झटपट परस्पर सलाह

महर्षि याज्ञवल्क्य नियमितरूपसे प्रतिदिन उपनिषदोंका उपदेश करते थे। आश्रमके दूसरे विरक्त शिष्य तथा मुनिगण तो श्रोता थे ही, महाराज जनक

एक समय स्वामी विवेकानन्दको इस बातका बड़ा दुःख हुआ कि उन्होंने अभीतक ईश्वरका दर्शन नहीं किया, भगवान्की अनुभूति नहीं प्राप्त