
हमारे हितकी भाषाका प्रयोग
हमारे हितकी भाषाका प्रयोग एक धनी व्यक्तिके घरमें आग लग गयी। बाहर निकलनेका केवल एक दरवाजा था। वहाँ एक कमरे

हमारे हितकी भाषाका प्रयोग एक धनी व्यक्तिके घरमें आग लग गयी। बाहर निकलनेका केवल एक दरवाजा था। वहाँ एक कमरे

(3)’तू गधा नहीं शेर है’ एक किसान अपने पके हुए खेतको बहुत-से मजदूरोंसे कटवा रहा था। जब थोड़ा-सा दिन बाकी

समझदारी किसी जंगलमें एक शेर रहता था। एक भेड़िया और एक लोमड़ी दोनों उसकी सेवामें उपस्थित रहते और उसके बचे-बचायेसे

मथुराकी सर्वश्रेष्ठ नर्तकी, सौन्दर्यकी मूर्ति वासवदत्ताकी दृष्टि अपने वातायनसे राजपथपर पड़ी और जैसे वहीं रुक गयी। पीत-चीवर ओढ़े, भिक्षापात्र लिये

एक महात्मा थे। वे राधाष्टमीका बड़े समारोहके। साथ बहुत सुन्दर उत्सव मनाते। एक दिन एक आदमी उनके पास आया और

नेपोलियन बोनापार्ट बचपन बहुत निर्धन थे किंतु अपने साहस और उद्योगसे वे फ्रांसके सम्राट् हुए। सम्राट् होनेके “पश्चात् वे एक

वास्तविक स्वरूपसे परिचय एक गाँवमें गोपाल नामका चरवाहा बालक रहता था। वह प्रतिदिन अपनी भेड़ोंको चरागाहमें ले जाकर, सारे दिन

‘सीख वाको दीजिये , (डॉ0 चक्षुप्रभाजी, एम0ए0, पी-एच0डी0) फाल्गुनका महीना चल रहा था। ठण्डी ठण्डी हवाके साथ धीमी-धीमी बूँदें भी

मित्रकी पहचान दो मित्र एक साथ भ्रमण करने निकले थे। संयोगवश उसी समय वहाँ एक भालू आ पहुँचा। एक मित्र

पुरानी बात है- अयोध्यामें एक संत रहते थे, वे कहीं जा रहे थे। किसी बदमाशने उनके सिरपर लाठी मारकर उन्हें