
मेरे कारण कोई झूठ क्यों बोले
कलकत्तेके सुप्रसिद्ध सुधारक विद्वान् श्रीरामतनु लाहिड़ी उन दिनों कृष्णनगर कालिजियट स्कूलके प्रधानाध्यापक थे। वे एक दिन कलकत्तेमें सड़ककी एक पटरीसे

कलकत्तेके सुप्रसिद्ध सुधारक विद्वान् श्रीरामतनु लाहिड़ी उन दिनों कृष्णनगर कालिजियट स्कूलके प्रधानाध्यापक थे। वे एक दिन कलकत्तेमें सड़ककी एक पटरीसे

प्राचीन कालमें सृञ्जय नामके एक नरेश थे। उनके कोई पुत्र नहीं था, केवल एक कन्या थी । पुत्रप्राप्तिकी इच्छासे उन्होंने

दैत्यराज हिरण्यकशिपु हैरान था जिस विष्णुको मारनेके लिये उसने सहस्रों वर्षतक तपस्या करके वरदान प्राप्त किया, जिस विष्णुने उसके सगे

उस समय मुगलसम्राट् अकबर राज्य कर रहा था। उसके बहुत-सी हिंदू बेगमें भी थीं। उनमेंसे एकका नाम था जोधाबाई ।

बाबा श्रीभास्करानन्दजी अपनी गङ्गातटकी कुटिया में बैठे भगवन्नामका जप कर रहे थे। सहसा आहट पाकर उनकी दृष्टि सामने की ओर

बुद्धिका चातुर्य एक वृद्ध महिलाकी आँखें बड़ी कमजोर हो गयी थीं, इस कारण वे कुछ देख नहीं पाती थीं। पासहीमें

श्रीजीव गोस्वामीजीके समयकी बात है। उनके प्रेमी एक महात्मा कदमखंडीमें बैठे श्रीराधा-माधवकी मधुर लीलाका ध्यान कर रहे थे। उनको दिखायी

मिश्र देशके प्रसिद्ध संत सेरापियोकी त्याग वृत्ति उच्च कोटिकी थी। चौथी शताब्दीके संत-साहित्यमें उनका नाम अमित प्रसिद्ध है। वे सदा

जूलियस सीज़रके विरुद्ध उसके शत्रु षड्यन्त्र करनेमें लगे थे। उसके शुभचिन्तकों तथा मित्रोंने सलाह दी – ‘आप अपने अङ्गरक्षक सिपाहियों

‘इस संसारके सब प्राणी अपने ही हैं, कोई भी पराया नहीं है। पापी घृणाका पात्र नहीं है, उससे निष्कपट प्रेम