
भगवान्का नृत्य-दर्शन
बाबा खड्गसेनजी बड़े ही प्रेमी भक्त थे। इनके जीवनधन व्रजेन्द्र-नन्दन श्रीकृष्णचन्द्र थे। ये उन्हींके स्मरण- चिन्तन एवं स्तवनमें व्यस्त रहते

बाबा खड्गसेनजी बड़े ही प्रेमी भक्त थे। इनके जीवनधन व्रजेन्द्र-नन्दन श्रीकृष्णचन्द्र थे। ये उन्हींके स्मरण- चिन्तन एवं स्तवनमें व्यस्त रहते

लोकजीवनकी बोधकथाएँ ‘न्याय होय तो असो’ परिवारमें सामान्य चर्चा चल रही थी। तब एक बात न्याय सम्बन्धी निकली कि न्याय

अपनी पत्नी यशोधराको पुत्र राहुलको, हमूर्ति पिता महाराज शुद्धोदनको तथा वैभवसम्पन्न राज्यको ठुकराकर युवावस्थामें ही गौतम परसे निकले थे। केवल

एक समयकी बात है। महात्मा ईसा अपने शिष्यों से घिरे हुए एक स्थानपर विश्राम कर रहे थे। कुछ देर पहले

‘आप घर तो नहीं भूल गये हैं? मैं इस सम्मानका पात्र नहीं हूँ।’ ‘भूले नहीं हैं, निश्चय ही हम आपकी

‘इंगलैंड नैपोलियन बोनापार्टकी निरंकुशता नहीं सह सकता है। माना, फ्रेंच क्रान्तिकारियोंने समता, स्वतन्त्रता और बन्धुताका प्रकाश फैलाया, पर नैपोलियनने अपनी

वकील भी सच्चे हो सकते हैं लोग कहते हैं कि वकीलका पेशा ही झूठका पेशा है। ‘घोड़ा घाससे यारी करेगा

(6) निन्दा और प्रशंसाका नतीजा जैन सन्त उमास्वामीके पास एक व्यक्ति बड़ी जिज्ञासाके साथ पहुँचा। तब सन्तजी किसी ग्रन्थकी रचनायें

मार्गमें एक घायल सर्प तड़फड़ा रहा था । सहस्रों चींटियाँ उससे चिपटी थीं। पाससे एक सत्पुरुष शिष्यके साथ जा रहे

आपसकी कलहसे विपत्ति आती है किसी समय एक चिड़ीमारने चिड़ियोंको फँसानेके लिये पृथ्वीपर जाल फैलाया। उस जालमें साथ-साथ रहनेवाले दो