
संतसेवा
अहमदाबादके प्रसिद्ध संत महाराज सरयूदासके जीवनकी एक घटना है; उनके पूर्वाश्रमकी बात है। वे साधु-संतोंकी सेवामें बड़ा रस लेते थे।

अहमदाबादके प्रसिद्ध संत महाराज सरयूदासके जीवनकी एक घटना है; उनके पूर्वाश्रमकी बात है। वे साधु-संतोंकी सेवामें बड़ा रस लेते थे।

सिकन्दरने किसी कारणसे अपनी सेनाके एक सेनापतिसे रुष्ट होकर उसे पदच्युत करके सूबेदार बना दिया। कुछ समय बीतनेपर उस सूबेदारको

नया मुखिया किसी गाँवमें एक बड़े अनुभवी मुखिया थे। वे गाँवकी भलाई चाहते थे और गाँव उनकी हर बात मानता

पञ्चाल प्रदेशकी सर्वगुणसम्पन्ना विवेकशीला लोक विश्रुत सुन्दरी एक स्वयंवरा कन्या थी। वह श्रेष्ठ कुलमें उत्पन्न सत्पुरुषसे ही विवाह करना चाहती

‘न देने योग्य गौके दानसे दाताका उलटे अमङ्गल होता है’ इस विचारसे सात्विक बुद्धि-सम्पन्न ऋषिकुमार नचिकेता अधीर हो उठे। उनके

चीनसे भारत आनेवाले यात्री ह्यु-एन-साँग केवल घुमक्कड़ यात्री नहीं थे। वे थे धर्मके जिज्ञासु विद्याकी लालसा ही उन्हें दुर्गम हिमालयके

सत्य और असत्य एक दिन छायाने मनुष्यसे कहा-‘लो देखो, तुम जितने थे, उतने के उतने ही रहे और मैं तुमसे

अरुणके पुत्र उद्दालकका एक लड़का श्वेतकेतु था। उससे एक दिन पिताने कहा, ‘श्वेतकेतो! तू गुरुकुलमें जाकर ब्रह्मचर्य का पालन कर;

पहले समयकी बात है। एक धनी नवयुवक राजपथपर टहल रहा था। उसने रोने और सिसकनेकी आवाज सुनी और वह एक

कहते हैं कि बादशाह अकबरके खजांचीकी स्त्रीका रूप बड़ा ही अपूर्व था। एक बार कहीं उसे देखकर बादशाह महामोहमें पड़