


सती राजमति द्वारा नेमजी के तोरण पर आकर लौट जाने पर स्वयं द्वारा संसार त्याग कर संयम पथ धारण करने

कहानी : “बच्चा बीमार नहीं था, बस उसके शेष सभी रंग खत्म हो चुके थे।”(एक ऐसा नजरिया जो आपका जीवन

भगवान श्री राम के पास सुदर्शन चक्र इसलिए नही क्योंकि चक्र तथा शंख भरत एवम् शत्रुघ्न के रूप ने अवतरित

बरसाने में एक सेठजी रहते थे। उनके कई कारोबार थे, तीन बेटे तीन बहुएँ थी l सब के सब आज्ञाकारी

बहुत समय पहले की बात है, एक राजा था जिसका नाम था अजीत सिंह। वह न्यायप्रिय तो था, लेकिन उसका

रोम में एक सम्राट ने अपने बड़े वजीर को फांसी की आज्ञा दे दी थी। उस दिन उसका जन्म—दिन था,

एक बहुत बड़े और भव्य मंदिर में हज़ारों दीपक जलते थे। वहां का नियम था कि सूर्यास्त होते ही पूरा

एक समय की बात है, हिमालय की गोद में एक सिद्ध महात्मा रहते थे। उनके पास एक छोटा सा आश्रम

एक बार की बात है ,वृंदावन का एक साधू अयोध्या की गलियों में राधे कृष्ण राधे कृष्ण जप रहा था