
भगवान राम ने माता कौसल्या को आत्म कल्याण का ज्ञान दिया
।। श्री रामाय नमः ।।एक दिन जब श्रीरघुनाथ जी एकांत में ध्यानमग्न थे, प्रियभाषिणी श्री कौसल्या जी ने उन्हें साक्षात्

।। श्री रामाय नमः ।।एक दिन जब श्रीरघुनाथ जी एकांत में ध्यानमग्न थे, प्रियभाषिणी श्री कौसल्या जी ने उन्हें साक्षात्

पुराने जमाने में एक राजा हुए थे, भर्तृहरि। वे कवि भी थे।उनकी पत्नी अत्यंत रूपवती थीं। भर्तृहरि ने स्त्री केसौंदर्य

बाहर बारिश हो रही थी और अन्दर क्लास चल रही थी, तभी टीचर ने बच्चों से पूछा कि अगर तुम

तोते का गुण है निर्मोही होना। संन्यासी भी एक बार घर बार रूपी पिंजरा छोड़ देता है तो मुड़ के

“संसार में कुछ चीज़ें धन से खरीदी जा सकती हैं, जैसे रोटी कपड़ा मकान मोटर गाड़ी सोना चांदी इत्यादि।”“परंतु कुछ

एक आदमी के घर भगवान और गुरु दोनो पहुंच गये। वह बाहर आया और चरणों में गिरने लगा। वह भगवान

वडोदरा के पास एक गांव, गांव में कृष्ण भगवान के परम भक्त मनसुख मास्टरजी स्कूल में बच्चों को बहुत अच्छे

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरेराधे राधे राधे राधेसेवा एक

दुर्गादास था तो धनी किसान; किन्तु बहुत आलसी था| वह न अपने खेत देखने जाता था, न खलिहान| अपनी गाय-भैंसों

बहुत सुन्दर कृपा जरूर पढ़ें.एक आइसक्रीम वाला रोज एक मोहल्ले में आइसक्रीम बेचने जाया करता था ,.उस कालोनी में सारे