
भक्त भीम कुम्हार और उसकी पत्नी परलोक गमन
.दक्षिण में वेंकटाचल (तिरुपति बालाजी) के समीप कूर्मग्राम में एक कुम्हार रहता था। उसका नाम था भीम। वह भगवान का

.दक्षिण में वेंकटाचल (तिरुपति बालाजी) के समीप कूर्मग्राम में एक कुम्हार रहता था। उसका नाम था भीम। वह भगवान का

.एक बार अवंतिपुर में साधु कोटिकर्ण आए। उन दिनों उनके नाम की धूम थी।.उनका सत्संग पाने दूर-दूर से लोग आते

. एक महात्मा गंगा किनारे घूम रहे थे। एक दिन उन्होंने संकल्प कियाः ʹआज किसी से भी भिक्षा नहीं माँगूगा।

महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी तब वो बड़े दुःखी रहते थे पर ऐसे समय में

एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया में रहते थे। एक किरात (शिकारी), जब भी वहाँ से निकलता संत को

दीख जाइ उपबन बर सर बिगसित बहु कंज।मंदिर एक रुचिर तहँ बैठि नारि तप पुंज।। अर्थ-अंदर जाकर उन्होंने एक उत्तम

विवेकानंद अमरीका जा रहे थे, तो राजस्थान में एक राज—परिवार में मेहमान थे। राजा ने उनके स्वागत में एक समारोह

एक दस साल का लड़का गिरिश गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा जी के पास श्री डल्ला साहिब गाँव घूमने

एक पुत्र अपने वृद्ध पिता को रात्रिभोज के लिये एक अच्छे रेस्टोरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता

मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु अहंकार महाकवि माघ महाकवि माघ राजा भोज के राज्य में रहते थे।वह बहुत विद्वान् थे,लेकिन