
अद्भुत क्षमा (1)
जिसने दक्षिण अफ्रीकाके सत्याग्रहका इतिहास पढ़ा होगा, वह भलीभाँति जानता होगा कि निरपराध होते तथा परोपकार करते हुए महात्मा गांधी-

जिसने दक्षिण अफ्रीकाके सत्याग्रहका इतिहास पढ़ा होगा, वह भलीभाँति जानता होगा कि निरपराध होते तथा परोपकार करते हुए महात्मा गांधी-

यज्ञकी धूम शिखाओंसे गगन आच्छादित हो गयाः | उसकी निर्मल और स्वच्छ नीलिमामें विशेष दीप्ति अभिव्यक्त हो उठी। महाराज रथवीति

प्रणतपाल भगवान् कौरवों और पाण्डवोंका युद्ध निश्चित हो गया। युद्धमें श्रीकृष्णकी सहायता लेनेके लिये दुर्योधन और अर्जुन दोनों द्वारका गये।

मातृभाषाका महत्त्व इतिहासके प्रकाण्ड पण्डित डॉ0 रघुबीर प्रायः फ्रांस जाया करते थे। वे सदा फ्रांसके राजवंशके एक परिवारके यहाँ ठहरा

डॉक्टर प्राणजीवन मेहता गांधीजीके मित्रोंमेंसे थे। रेवाशंकर जगजीवनदास इनके भाई थे। पहले गांधीजी जब बम्बई जाते तब प्रायः इनके ही

एक बारकी बात है। एक संतके पास एक धनवान्ने रुपयोंकी थैली खोलकर उसे स्वीकार करनेकी प्रार्थना की। संतने उत्तर दिया

दो यात्री कहीं जा रहे थे। मार्गमें ही सूर्यास्त हो गया। रात्रि विश्रामके लिये वे पासके गाँवमें पहुँचे। वहाँके पटेलके

रामशास्त्री प्रभुणे पेशवाईके प्रमुख विचारपतिका काम कर रहे थे। साथ ही दानाध्यक्षका काम भी उन्हींके अधीन रहा। एक बार दक्षिणा

ऋषिकेशके जंगलमें पहले एक महात्मा रहते थे। उनका नाम था द्वारकादासजी वे बिलकुल दिगम्बर रहा करते थे। एक बार एक

परमात्माके विश्वासका ताना-बाना वृन्दावनमें एक जुलाहा था। एक कारीगरके रूपमें वह अत्यन्त भक्त और निष्ठावान् था। गाँवमें उसके समान अन्य