
संसारका स्वरूप
एक युवक बचपनसे एक महात्माके पास आया- | — जाया करता था। सत्संगके प्रभावसे भजनमें भी उसका चित्त लगता था।

एक युवक बचपनसे एक महात्माके पास आया- | — जाया करता था। सत्संगके प्रभावसे भजनमें भी उसका चित्त लगता था।

रविशंकर महाराज एक गाँवमें सवा सौ मन गुड़ बाँट रहे थे। एक लड़कीको वे जब गुड़ देने लगे, तब उसने

महाभारतके युद्धका नवम दिन था। आज भीष्मपितामहः पूरी उत्तेजनामें थे। उनका धनुष आज प्रलयकी वर्षा कर रहा था। पाण्डवदलमें क्षण-क्षणपर

सुकरातकी पत्नी अंटीपी अत्यन्त कर्कशा थी। वह अकारण ही पतिसे झगड़ा किया करती थी। एक बार किसी बातपर असंतुष्ट होकर

सिर झुकता है, पगड़ी नहीं ‘तुम चारण-जातिके होकर भी सभाकी रीति नीति नहीं जानते। मुझे तो यह जानकारी थी कि

स्पेनके पेरु प्रान्तके लिमा नगरमें सोलहवीं शताब्दी में संत रोजका जन्म हुआ था। वह असाधारण रूपवती थी उसके मनमें यह

वृत्रासुरका वध करनेपर देवराज इन्द्रको ब्रह्महत्या लगी। इस पापके भयसे वे जाकर एक सरोवरमें छिप गये। देवताओंको जब ढूँढ़नेपर भी

प्राचीन समयकी बात हैं। कुरुवंशके देवापि और शन्तनुमें एक दूसरेके प्रति स्वार्थ त्यागकी जो अनुपम भावना थी, वह भारतीय इतिहासकी

वे नागा साधु थे। एक नागा साधुके समान ही उनमें तितिक्षा थी, तपस्या थी, त्याग था और था अक्खड़पना। साधु

धर्मराज युधिष्ठिरका राजसूय यज्ञ समाप्त हो गया था। वे भूमण्डलके चक्रवर्ती सम्राट् स्वीकार कर लिये गये थे । यज्ञमें पधारे