
श्रद्धा और मनोबलका चमत्कार
वे एक ग्राममें रहते थे और कुछ दवा-दारू करते। थे। परंतु जिसकी चिकित्सा करते उससे लेते कुछ नहीं थे। एक

वे एक ग्राममें रहते थे और कुछ दवा-दारू करते। थे। परंतु जिसकी चिकित्सा करते उससे लेते कुछ नहीं थे। एक

अपने बुरे कर्मोंका फल यथासमय भोगना ही पड़ेगा महाभारतपर आधारित एक अनुश्रुति है कि राजा धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंके युद्धमें मर

एक बार एक ग्रीक राजा एक बौद्ध भिक्षुके पास गया। उसने उस भिक्षुसे, जिसका नाम नागसेन था, पूछा- ‘महाराज !

राजा बृहदश्व सौ अश्वमेध यज्ञ करना चाहते थे। लगभग बानवे यज्ञ वे कर चुके थे। उनके गुरु उस समय समाधिस्थ

किसा गौतमीका प्यारा इकलौता पुत्र मर गया। उसको बहुत बड़ा शोक हुआ। वह पगली-सी हो गयी और पुत्रकी लाशको छातीसे

पंढरपुरमें दामाजी सेठ नामक एक दर्जी (छींपी) भगवान् विट्ठलनाथके बड़े ही भक्त थे। उनके सुपुत्र नामाजीको भी बचपनसे वही लत

वरुणा नदीके तटपर अरुणास्पद नामके नगरमें एक ब्राह्मण रहता था। वह बड़ा सदाचारी तथा अतिथिवत्सल था। रमणीय वनों एवं उद्यानोंको

वायिन्सको पोलैंडका बहुत बड़ा देशभक्त था अपने आत्मचिन्तन और दार्शनिक विचारोंके लिये भी वह बहुत प्रसिद्ध था। लोग उसका बड़ा

गौतम बुद्धके समयमें एक पुरुषने एक बहुमूल्य चन्दनका एक रत्नजटित शराव (बड़ा प्याला) ऊँचे खंभेपर टाँग दिया और उसके नीचे

एक वनमें वटवृक्षकी जड़में सौ दरवाजोंका बिल बनाकर पलित नामका एक बुद्धिमान् चूहा रहता था । उसी वृक्षकी शाखापर लोमश