
रानी अहल्याबाई
रानी अहल्याबाई वह रानी थी अहल्याबाई। उस अहल्याबाईने बहुत-से यज्ञ-याग आदि करके एक पुत्र प्राप्त किया। पुत्र नन्हा था। रानी

रानी अहल्याबाई वह रानी थी अहल्याबाई। उस अहल्याबाईने बहुत-से यज्ञ-याग आदि करके एक पुत्र प्राप्त किया। पुत्र नन्हा था। रानी

लंबी लाठी कंधेपर रखे, कमरमें तलवार बाँधे • फतहसिंह अपनी स्त्री राजूलाको ससुरालसे विदा कराके | घर जा रहा था।

धर्म तो सदा अभ्युदय ही करता है जब वामन भगवान के आदेशसे उनके पार्षदोंने राजा बलिको बाँध लिया तो ब्रह्माजीने

एक सम्पन्न व्यक्ति बहुत ही उदार थे। अपने पास आये किसी भी दीन-दुखीको वे निराश नहीं लौटाते थे; परंतु उन्हें

लगभग तीन हजार साल पहलेकी बात है। एक समय भगवान् बुद्ध राजगृहमें विहार कर रहे थे । देवदत्त उनसे ईर्ष्या

शिवाजी अपने तंबू में बैठे सेनानी माधव भामलेकरके आनेकी चिन्तापूर्ण प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी बीच हाथमें एक ग्रन्थ लिये