हे मालिक ! दिन भर में मुझसे कोई ऐसा करम न हो । जो तेरी नजर में गुनाह हो !!
हक हलाल की कमाई खाऊं !!! किसी का दिल न दुखाऊं सबसे नि:स्वाथ प्रेम करू ! जितना हो सके चलते फिरते सिमरन करू !!
हर पल आपकी याद बनी रहे जी.
राधे राधे जी
हे मालिक ! दिन भर में मुझसे कोई ऐसा करम न हो । जो तेरी नजर में गुनाह हो !!
हक हलाल की कमाई खाऊं !!! किसी का दिल न दुखाऊं सबसे नि:स्वाथ प्रेम करू ! जितना हो सके चलते फिरते सिमरन करू !!
हर पल आपकी याद बनी रहे जी.
राधे राधे जी