यह 30 साल पुरानी सत्य कथा है| एक वृद्ध आदमी था ,जो राम जी का बड़ा भक्त था। उसका नाम भोला था तो हर बात पर “राम जी जाने”!
उसकी लड़की जवान थी। तो उसके पुत्रों ने कहा,” पिताजी पैसे तो है नहीं, कर्जा लेकर ही बहन की शादी कर दो!
तो वो (भक्त) गया, एक बनिए के पास,
भोला :- बनिए! हमें कुछ उधार दीजिए, बेटी की शादी करनी है।
बनिया :- अच्छा! लिख कर दो मुझे भाई, इतने पैसे तुम मेरे से ले रहे हो, फिर मुझे ब्याज के साथ वापस दोगे।
उसने लिखकर दस्तख कर दिये(भक्त ने)
बनिए ने देखा ये बड़ा सीधा आदमी है!
उसने क्या किया?
जो उसने पहले लिख के दिया, वो बदल दिया। उसने फिर रकम बढ़ा दी और वो उसका लिखा हुआ (भक्त का) नोट ऊपर रख दिया।
तो क्या हुआ?
कि बनिए ने मुकदमा कर दिया भक्त पर कि मेरे पैसे नहीं दे रहा ये, मुकदमा कर दिया तो अदालत में जाना पड़ा, कि इसने ( भक्त ने) मेरे पैसे देने है, दे नहीं रहा।
न्यायधीश:- “तुने इससे पैसे लिए थे?”(बनिए से)
भोला :- “हाँ !”
न्यायधीश :- कितने लिए थे?
(बनिए ने नोट ऊपर 📑से बदल दिया था ना, वो अनपढ़ था बेचारा (भक्त) ।
“तेरा कोई गवाह है?”
भोला :- मैंने तो इतने ही पैसे लिए थे, बाकी राम जी जाने।
तो न्यायाधीश सोचने लगा राम जी कोई व्यक्ति है?
तो राम जी के नाम का सम्मन 📩निकाल दिया, कि राम जी आ कर गवाही दे।
न्यायाधीश :- “कहां रहते हैं राम जी?”
भोला :- “गाँव में ।”
तो मंदिर के पते पर सम्मन आ गया। दूसरे दिन कोर्ट में पेश होना था। पुजारी ने राम जी को अच्छे कपड़े पहना दिये।
उधर बुलाया गया राम जी हाजिर हो!
राम जी सच में आ गए
क्योंकि वो व्यक्ति बडा़ सीधा- साधा था।
राम जी का ही भरोसा था उसको, भगवान आ गए मनुष्य रूप मे ।
न्यायाधीश :-कितने पैसे लिए थे इसने?
भगवान राम :- जितने वो गरीब कह रहा है!
राम जी न्यायाधीश को कहते,” जो नोट📄 इसने(बनिए ने) लिखवाया था इससे(भक्त से), वह फलानी जगह रखा हुआ है, और ये झुठा(नोट) इसने बनाया है।
न्यायधीश :-“घर जाओ और तलाशी लो!”
असली जो नोट था, वो ले आये तो उसको बरी किया(भक्त को)। उसको सजा दी(बनिए को) और राम जी चले गए!
अभी न्यायाधीश पुछता है राम जी कौन है?
पता लगते-लगते, न्यायधीश को पता लग गया, भगवान आये थे भेस बदल कर।
तो यह पता लगते ही न्यायाधीश ने इस्तीफा दे दिया और वृंदावन में आ गया और साधु बन गए |













