राधा कृष्ण भाव

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बैठी है झरोखे प्यारी कुंज भवन मों
महलु न पावे पीय ठाढे दरसन कों ।
उजारी तें उजारी माथे माँग सोहे गंगा जैसे
जानी हरि भए अतिहेतु परसन कों ॥
जानी है बाति गुर भई ललिता जीउ
ल्याई हैं लालु तहाँ निधि बरसन कों ।
मिल्ये है मोहन राधा केवल छवि अगाधा
मेट्यो है दोऊ उर काम तरसन कों ॥

श्री राधिका कुंज महल में जालीदार खिड़की के पास बैठीं हैं। प्रियतम श्री कृष्ण महल के अंदर नहीं पहुँच पा रहे, इसलिए वे बाहर ही खड़े होकर उनके दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

श्री राधा का माथा साक्षात तेज [उजियारा] से भी अधिक तेजस्वी है, जिनकी माँग [के मोती] मानो गंगा जी के समान हैं, जिस का रूप ध्यान करते हुए श्री हरि श्री राधिका के स्पर्श के लिए अत्यंत तरस रहे हैं ।

दिव्य युगल श्री राधा और कृष्ण की इस स्थिति को देखते हुए, श्री ललिता जी ने गुरु की तरह व्यवहार करते हुए श्री लालजी को महल के बाहर से महल के अंदर ले आई जिससे निधि [रस] को बरसाया जा सके ।

श्री राधा और कृष्ण दोनों मिलते हैं, अथाह सौन्दर्य की वर्षा होती है, और दोनों के हृदय से तृष्णा मिट जाती है।

श्री राधा का माथा साक्षात तेज [उजियारा] से भी अधिक तेजस्वी है, जिनकी माँग [के मोती] मानो गंगा जी के समान हैं, जिस का रूप ध्यान करते हुए श्री हरि श्री राधिका के स्पर्श के लिए अत्यंत तरस



Sitting in the window of Pyari Kunj Bhavan Mahlu na pave drink tha darsan ko. Ujari te Ujari forehead demand sohe like Ganga Jani hari bhaye for atihetu person ko You know, good thing is, Lalita jiu Lalu is there to Nidhi Barsan. milye hai mohan radha only image agadha metyo hai dou ur work longing for

Shri Radhika is sitting near the lattice window in Kunj Mahal. Dearest Shri Krishna is unable to reach inside the palace, so he is standing outside waiting for his darshan.

Shri Radha’s forehead is brighter than the radiance [light], whose demand [of pearls] is like that of Ganga ji, whose form while meditating, Shri Hari yearns for the touch of Shri Radhika.

Seeing this condition of the divine couple Shri Radha and Krishna, Shri Lalita ji, behaving like a guru, brought Shri Lalji from outside the palace inside the palace so that the nidhi [rasa] could be showered.

Shri Radha and Krishna both meet, there is a shower of immeasurable beauty, and the longing disappears from the heart of both.

Shri Radha’s forehead is brighter than the radiance [light], whose demand [of pearls] is like that of Ganga ji, whose form while meditating, Shri Hari yearns for the touch of Shri Radhika.

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