हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे


हरे कृष्ण हर कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

सोलह अक्षरों का महामंत्र

हरे कृष्ण, हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।
हरे राम, हरे राम,
राम राम, हरे हरे॥

सोलह अक्षरों का ये मंत्र,
महामंत्र कहलाता है।
कलयुग के सब दोषों से,
बस, यही हमें बचाता है॥

शास्त्रों में कहा गया है,
इसके अतिरिक्त कोई उपाय नही।
कलयुग में और कुछ भी,
हो सकता सहाय नही॥

सतयुग में तपस्या से,
पास हरि के जाते थे।
त्रेता युग में यज्ञों से,
हरि को हम, पास बुलाते थे॥

द्वापर युग में करते थे लोग,
अर्च-विग्रह की सेवा, पूजा।
कलयुग में महामंत्र के सिवाय,
उपाय नही कोई दूजा॥

इस घोर कल्मष के युग में,
कीर्तन से ही, हरि मिल जाते हैं।
महामंत्र उच्चारण से,
कृष्ण को, जिह्वा पे हम नचाते हैं॥

चित्त को हमारे,
शुद्ध करता है ये हरिनाम कीर्तन।
जप-जप के हरि नाम,
चमक जाता, मन का दर्पण॥

बड़ा ही सरल और सटीक,
तरिका है जीने का।
न गवाऐं हम यह मौका,
इस अमृत्व को पीने का॥

बिना देर किये, जहाँ हैं,
वहीं से कर दो शुरुआत।
कर ले सच्ची कमाई कुछ,
जब तक मौत करे आघात॥

फिर चिंता न हो कि,
कब मौत से पाला पड़े।
जब भी प्राण छूटे,
दिखे बस, हरि सामने खड़े॥

जय प्रभुपाद
हमेशा हरे कृष्ण महामंत्र जपते रहो
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।
हरे राम, हरे राम,
राम राम, हरे हरे॥

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