
मैं तो खेलूंगा होली आज राधा तेरे अंगना में
मैं तो खेलूंगा होली आज राधा तेरे अंगना में ओ राधा तेरे अंगना में, ओ राधा…. लाल रंग डालूं, गुलाबी

मैं तो खेलूंगा होली आज राधा तेरे अंगना में ओ राधा तेरे अंगना में, ओ राधा…. लाल रंग डालूं, गुलाबी

शायद बीती याद दिला दे ये फागुन।फिर से कोई साध दिला दे ये फागुन!!फिर से कच्चे -पक्के रंगों की बारिश

जब गुरु मिले तो बरसाने की होली भीतर खिल उठी! ज़िंदगी की दौड़ में थका एक भक्तमन में सवाल, आँखों

राधे संग श्याम खेलैं होरी।इत अगनित सखियन सँग राधे, उतै सखन श्यामहुँ जोरी।फाग-समर-आँगन वृन्दावन, भिरे दोउ दल झकझोरी।लालहिं-लाल-गुलाल लाल भये,

आज अभी होलिका जलेगी । इसे संवत जलना भी बोलते हैं । पुराना संवत जल जाता है और नए संवत

श्याम मेरा होली खेलन आया, कन्हैया मेरा होली खेलन आया. होली खेलन, होली खेलन आया, श्याम मेरा होली खेलन आया

(हिंदी अर्थ सहित) ॐ नमो भगवते लक्ष्मीनृसिंहाय। क्लीं ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनृसिंहाय नमः स्वाहा। धर्मसंस्थापनार्थाय ज्वालामालावृताय ते।होलिकादहनोद्भासि प्रह्लादरक्षकाय ते नमः।।१।। हे

मेरे मन की होली वृंदावन की फागुन भरी सुबह थी। मंद-मंद हवा में गुलाल की खुशबू घुली हुई थी। मंदिरों

आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर । आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर । नटवर नंद

होली खेलन राधा आई रे जाके कान्हा से कह दो कान्हा से कह दो मुरली वाले से कह दो बरसाने