
जब जब कृष्ण ने बंसी बजाई
जब जब कृष्ण न बंसी बजाईतब तब राधा मन हर्षाईसखियों संग जमुना तट पहुचीपर कही दिखे न कृष्ण कन्हाई“नटखट नंदगोपाल

जब जब कृष्ण न बंसी बजाईतब तब राधा मन हर्षाईसखियों संग जमुना तट पहुचीपर कही दिखे न कृष्ण कन्हाई“नटखट नंदगोपाल

शबरी को आश्रम सौंपकर महर्षि मतंग जब देवलोक जाने लगे, तब शबरी भी साथ जाने की जिद करने लगीं ।

सत सृष्टि तांडव रचयितानटराज राज नमो नमः ।हे आद्य गुरु शंकर पितानटराज राज नमो नमः ॥ गंभीर नाद मृदंगनाधबके उरे

पौराणिक काल में एक वृंदा नाम की लड़की थी। उसका जन्म राक्षस कुल में हुआ था। वृंदा बचपन से ही

श्री सियावर रामचन्द्रजी की जय दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्रजी अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात

परिवार के सभी आदरणीय भगत जनों एवम् मातृ शक्ति को जय राम जी की भगवान की कौन सी लीला में

.बरसाना में श्री रुप गोस्वामी चेतन्य महाप्रभु के छः शिष्यो में से एक । एक बार भ्रमण करते करते अपने

जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत, शम्भु रटत शेष रटत ।नारद शुक व्यास रटत, पावत नहीं पार री ॥ध्रुवजन प्रह्लाद रटत,

*आनन्द तो केवल श्री कृष्ण प्रेम में है।* *कोई भक्त,रसिक जब लम्बी गहरी सांस लेकर..आँखों में प्रेमाश्रु भर कर..आह कृष्ण…हे

पुराण की कथाहनुमानजी के श्वांस से सुन रामधुन, महादेव-पार्वती संग देवलोक उठा झूम रावण के वध के बाद अयोध्यापति श्रीराम