
जय महाकाल
*मैं निराकार, मैं ही आकार हूँ,**मैं महाकाल, मैं ही किरात हूँ ।।**समय का प्रारब्ध, मैं समय का ही अंत हूं,**मैं

*मैं निराकार, मैं ही आकार हूँ,**मैं महाकाल, मैं ही किरात हूँ ।।**समय का प्रारब्ध, मैं समय का ही अंत हूं,**मैं

सुभाषितॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ अर्थात:परमेश्वर हम शिष्य और आचार्य दोनों की साथ-साथ

सभी महान गुरुजन बताते हैं, कि इस शरीर के भीतर अमर आत्मा है। उस ईश्वर की एक चिंगारी जो सब

भगवान श्री कृष्ण गोपियों के नित्य ऋणी हैं, उन्होंने अपना यह सिद्धात घोषित किया है:- ये यथा माँ प्रपधन्ते तांस्तथै

एक समय भगवान कृष्ण ने, अर्जुन को कजली बन में पुष्प लेने के लिए भेजा। हनुमान जी वहां केले के

गरुड़ देव के ये रहस्य आपको आश्चर्यचकित कर देंगे! आखिरकार भगवान विष्णु के वाहन गरूढ़ का क्या रहस्य है? क्यों

एक संत थे वे राम कथा लिखते थे दिन भर में जो लिखते थे शाम को भक्त लोग इकट्ठा होते

“अरे मैय्या को तो सब पता है..।इनको कैसे पता चला की मैं पिछले जन्मो में एक बार सूकर के रूप

संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है, हम और आप तो केवल निमित्त मात्र

एक बार राधा जी सखी से बोलीं–‘सखी ! तुम श्री कृष्ण की प्रसन्नता के लिए किसी देवता की ऐसी पूजा