
राम भगवान हैं राम आत्माराम है
राम भगवान हैं राम आत्माराम है भगवान राम जगत पिता है। राम हमारी आत्मा की पुकार है। राम को जप

राम भगवान हैं राम आत्माराम है भगवान राम जगत पिता है। राम हमारी आत्मा की पुकार है। राम को जप

बाहरी आंखें बन्द करलो अन्दर उजाला ही उजाला है दीपक अग्नि घी और बाती से जलाए जाते हैंअन्दर झांक कर

प्रभु हम पे कृपा करना,प्रभु हम पे दया करनाबैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करनाप्रभु हम पे कृपा करना,प्रभु

निर्गुण निराकार भगवान् भक्त की भक्ति से रिझ कर शरीर धारण करते हैं। भक्त भगवान् नाथ मे इतना डुब जाता

जहाँ प्रेम है वहां प्रभु प्रेम की खोज प्रारम्भ होती है। वह किरया कर्म में परमात्मा को खोजता है। हे

भगवान को याद करते हुए यह भाव दिल में बनते हैं। कि आज मेरे स्वामी भगवान् नाथ देखो मुस्करा रहे

भगवान ने गोपी प्रेम के माध्यम से मानव जाति को प्रेम का सन्देश कितने मनोभाव से प्रकट किया है और

कान्हा को राधा ने प्यार का पैगाम लिखा पूरे खत में सिर्फ कान्हा-कान्हा नाम लिखा. कोई प्यार करे तो राधा-कृष्ण

आज मैं अपने मन को दिल को नैनो राम नाम अमृत रस का रसपान कराना चाहती हूं। आत्मा कहती हैं

जय श्री राम परमात्मा हममें समाया हुआ है। यह कहने मात्र से बात नहीं बनती है। जब तक भगवान को