
रुद्र गायत्री मंत्र
रुद्र रूप में भगवान शिव के साथ संरेखित करने के लिए रुद्र गायत्री मंत्र का अभ्यास किया जाता है। रुद्र

रुद्र रूप में भगवान शिव के साथ संरेखित करने के लिए रुद्र गायत्री मंत्र का अभ्यास किया जाता है। रुद्र

प्रथमं तु महादेवं द्वितीयं तु महेश्वरं।तृतीयं शङ्करं प्रोक्तं चतुर्थं वृषभध्वजम्।।१।। पञ्चमं कृत्तिवासं च षष्ठं कामङ्गनाशनं।सप्तमं देवदेवेशं श्रीकण्ठं चाष्टमं तथा।।२।। नवमं

ममतामयी माता के अनन्त रूप हैं और वही माता संसार में सर्वाधिक पूज्य हैं। “ब्रह्मवैवर्तपुराण” के गणेश खंड में कहा

॥ ॐ श्रीमहादेव्यै नमः ॥ सुप्रभात प्रातः स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहार-भूषाम् दिव्यायुधैर्जितसुनील-सहस्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् भावार्थः शरद् कालीन चन्द्रमा के समान

नवरात्रमें भगवती की कृपा प्राप्त करने के शास्त्रोंमें अनेक विधान है । अपने अपने कुल की ओर गुरु परंपराओं के

सभी स्नेहीजनों को पावनपर्वशारदीय नवरात्रि- २०२३ कीहार्दिक शुभकामनाएं……. ! माता रानी अपने सभी भक्तों का मङ्गल करें ! इस वर्ष
15 अक्टूबर 2023 इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर्व पर माँ भगवती हाँथी पर सवार होकर आ रही है,इसे देवी दुर्गा

शिव की महिमा निराली है,शिव के सिर गंगा बहती है,शून्य से संपूर्ण और शून्य,मृगछाला ओढे त्रिशूल धरे नंदी वाहक है

१. ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री काली नित्य सिद्धमाता स्वाहा।२. ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कपलिनी नागलक्ष्मी स्वाहा।३. ॐ ऐं

राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी कैसे खत्म हुई और क्या हुआ फिर राधा का, कैसे हुआ था उनका अंत!!!!! कई वर्षों