
30 “श्रीचैतन्य–चरितावली
।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *दिग्विजयी का वैराग्य* [30]

।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *दिग्विजयी का वैराग्य* [30]

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम अद्वैताचार्य और उनका सन्देह अर्चयित्वा तु गोविन्दं तदीयान्नार्चयेत्तु यः। न स भागवतो

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम पूर्व बंगाल की यात्रा विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्यं कदाचन। स्वदेशे

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम पत्नी-वियोग और प्रत्यागमन पतिर्हि देवो नारीणां पतिर्बन्धुः पतिर्गतिः। पत्युर्गतिसमा नास्ति दैवतं वा

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम नवद्वीप में दिग्विजयी पण्डित सभायां पण्डिताः कोचित्केचित्पण्डितपण्डिताः। गृहेषु पण्डिताः केचित्केचिन्मूर्खेषु पण्डिताः।। भगवद्दत्त

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम दिग्विजयी का पराभव परैः प्रोक्ता गुणा यस्य निर्गुणोऽपि गुणी भवेत्। इन्द्रोऽपि लघुतां

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम नवद्वीप में ईश्वरपुरी येषां संस्मरणात्पुंसां सद्यः शुद्ध्यन्ति वै गृहाः। किं पुनर्दर्शनस्पर्शपादशौचासनादिभिः।। बड़े-बड़े

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम विवाह न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते। तया हि सहितः सर्वान् पुरुषार्थान् समश्नुते।। वट

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम विद्याव्यासंगी निमाई अन्या जगद्धितमयी मनसः प्रवृत्ति- रन्यैव कापि रचना वचनावलीनाम्। लोकोत्तरा च

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम व्रत-बन्ध जन्मना जायते शूद्रः संस्काराद् द्विज उच्यते। वेदपाठी भवेद् विप्रः ब्रह्म जानाति