
ज्योति जगा लो सिर को जुका लो
ज्योति जगा लो सिर को जुका लो मन चाहा वर माँ से पा लो मैया दीदार दे रही है भगतो

ज्योति जगा लो सिर को जुका लो मन चाहा वर माँ से पा लो मैया दीदार दे रही है भगतो

वे सुनिआरिया कर्मा वालेया मेरी माई दी नथ बनाई वे नथ बनाई वे मोती लाई वे मोती लाई वे सोहनी

सानू किसे बहाने सद लै माँ, बड़ा तैनू मिलण नूं जी करदा, थोड़ा टाईम साडे लई कड लै माँ, बड़ा

मीह रेहमता दा पा दे अमिए तक दी न सोके मलका, ना पल्ले साड़े कुझ अमिए तकड़ीया लेन हारियाँ, मीह

कभी फुर्सत मिल जाए तो आना घर मेरे महारानी, वेलकम है परिवार में मेरे तेरा ओ महारानी कभी फुर्सत मिल

बदला दे विच तेरा दर दातिये, दस इथो बिना केहड़ा मेरा घर दातिये, तक भनेया नु दिल नहियो भर दा

मेरी माँ आ भी जाओ, मैं तेरा दीदार करलु मेरी माँ आ भी जाओ, बैठी सिंह सवारी माँ, लगती प्यारी

कंठ समाओ स्वर को सजाओ जीवन धन्य बनाओ, मैं मूरख अज्ञानी मैया ज्ञान की राह दिखाओ, आओ आओ शारदे माँ

जे तू ही ना पूछे साडा हाल ना बोले साड़े नाल, ते साड़े पल्ले की रह गया, साड़े पुरे न

याहा पे बिन मांगे पूरी मन्नत होती है माँ के चरणों में ही तो वो जन्नत होती है फीके लगते