
एक बार माँ आ जाओ
एक बार माँ आ जाओ फिर आके चली जाना, हमें दर्श दिखाओ दिखला के चली जाना, तुम को मेरे गीतों
एक बार माँ आ जाओ फिर आके चली जाना, हमें दर्श दिखाओ दिखला के चली जाना, तुम को मेरे गीतों
नवरात्रि का छठा है यह माँ कात्यायनी रूप। कलयुग में शक्ति बनी दुर्गा मोक्ष स्वरूप॥ कात्यायन ऋषि पे किया माँ
मिल गया मिल गया शेरा वाली दा सहारा मिल गया, तुझे मिला मुझे मिला सब को मिला महारानी दा द्वारा
मैया करे मोबाइल फ़ोन भवन पे आ जा लांगुरिया, मैया करे मोबाइल फ़ोन… चिंतापुरनी मनसा देवी कालका फ़ोन लगाये, केला
हाँ मैया जी अस्सी नौकर तेरे । सेवा तेरी दे विच्च खड़ा रहा रवां मैं शाम सवेरे ॥ दोवे हत्थ
धून – जिंदगी एक सफ़र है सुहाना मैया का भवन है सुहाना, यहाँ कल क्या हो किसने जाना मैया के
शेरावाली की दया सबपे सदा रहती है , वो कहा अपनी बचो से ख़फ़ा रहती है, शेरावाली की दया सदा
जय कारे बोलते चलो भवन हमें जाना है माँ के, मन में है धारणा हिमत ना हारना, चलना है चलते
जितनी ऊंची चढ़ाई उतनी ही गहरी खाई, पर भगतो न गबरना है माँ की चिठ्ठी आई, डरने की क्या दरकार,
मोतियन चौक पुरायों मोरी माई री मैया मोरे अंगना में अइयो, चंदन को री पलना बनवायों , नित नित झूला