
सदा झोलियां भरते दे वरदान जी
सदा झोलियां भरते दे वरदान जी, श्री इच्छापूर्ण पीपल वाले हनुमान जी, अन्य देते और धन देते भक्तों के के

सदा झोलियां भरते दे वरदान जी, श्री इच्छापूर्ण पीपल वाले हनुमान जी, अन्य देते और धन देते भक्तों के के

बेड़ो पार करे भक्ता को बेड़ो पार करे, मेहंदीपुर वालो बाला जी बेड़ो पार करे, बेड़ो पार करे भक्ता के…..

सिया राम लखन वनवास चले दसरथ के दर्द को क्या जाने आस में सास अटकी थी टूट गई पिता जी

इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे उधर दशरथ घर भगवान जन्मे महलों में खुशियाँ अयोध्या में आनंद इधर पवन पिता झूम

मारो दूध क्यों न जाए रे बेटा हनुमान दूध क्यों लजायो मारो दूध क्यों लजायो मारो दूध क्यों न जाए

एक कंधे पर लखन विराजे दूजे पर रघुवीर, वीर बलि महावीर हरी तुमने भगतो की पीड़, सिया राम के भजन

वा वा रे बजरंगी बाला बडो बलकारी रे बाली बस में मनड़ो मछलियो , कूद कर अम्बर में उतरियो औजी

तर्ज – झुठ बोले कवा काटे सारा संकट पल मे काटे , देखो अजंनी को लालो बाबो दाडी मुच्छा राखे

सीना चीर के बोले, हनुमान जी, मेरे ह्रदय, विराजे श्री राम जी , जिसके ह्रदय, राम वसे हैं, “वोह यह

वीर बली लंका में पहुंचा तोड़ दिया परकोटा बड़े-बड़े युद्ध को मारा और घुमाया सोटा ओ बल्ले बल्ले हो गई