
देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई
सीता जी के भाग जगे श्री राम ने माला पहनाई, देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई,

सीता जी के भाग जगे श्री राम ने माला पहनाई, देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई,

है नन्दलाल जय नन्दलाल जय गोपाल, जय नन्दलाल जय गोपाल, इन प्राणों के भीतर गूंजा नही, मुरली ध्वनी का घनघोर

श्याम हरजाई, काहे तोसे प्रीत लगाई चैन गवांया, निंदिया गवाईं, तन मन सुध बिसराई काहे तोसे प्रीत लगाई . .

श्री राधे-राधे राधे-राधे राधे-राधे बोल॥ ॥, मन राधे-राधे राधे-राधे राधे-राधे बोल॥ बरसाने की राधे प्यारी, गोकुल का है छोरा, राधे

नंदगाँव से होली खेलने , आयो माखनचोर वो होरी में , मोहे रंग गयो नंदकिशोर अरी वो होरी में ,

राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से, मेरे कान्हा के लड़ गए नैन राधिका गोरी से, जगते राधा सोते राधा

होली खेलन आयो श्याम आज याहि रंग में बोरो री, कोरे-कोरे कलश मँगाओ, रंग केसर को घोरो री, मुख ते

मोहे भूल गए सांवरिया, आवन केह गए अजहू न आये, लीनी न मोरी खबरिया मोहे भूल गए सांवरिया, दिल को

धुबतो को बचा लेने वाले मेरी नैया है तेरे हवाले, लाख अपनों को मैंने पुकारा पर न कोई बना था

मुरली बजा के मोहना क्यों कर लिया किनारा। अपनों से हाय कैसा व्यवहार है तुम्हारा॥ ढूंढा गली गली में, खोजा