
बड़ी देर भई नंदलाला तेरी राह तके बृज बाला
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृज बाला

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृज बाला

तेरे हथ डोर साडी साँवरे, नचाई जा नचाई जा नचाई जा ॥ दाता असीं कमजोर, साडी तेरे हथ डोर ॥

छलिया छलिया कहे गुजरी, छलियाँ रंग दिखावे गा, मैं तेरी बांसुरी हर लू गी जो तू मोहन इतरावेगा, मीठी लागे

पुत नन्द ते यशोदा देया जाया तेरी कमली ने कमला बनाया मैं सुणया कुब्जा ते डुल्या मथुरा जाके गोकुल भुल्या

जब से गये मेरे मोहन परदेश में। तब से रहती हूँ पगली के वेश में॥ कभी नींद न आये,कभी नैना

ये दर वो दर नहीं है जो सिफाऱिशियो से चलता है, यहां पे काम तो प्यारे सत्ये के दम पे

मिलना है मिलना क्या मिलना हमारा, पल दो पल का क्या मिलना हमारा, याचक है दर के तुम्हारे ओ श्याम

रुपिया पैसा ना जागीरें मोहे श्याम मिल जाए काफी है, बिगड़े बने ये तकदीरे मोहे श्याम मिल जाये काफी है,

कठे से आयो श्याम, कठे से आयो शंकर, कठे से आयो रे माता अंजनी को लालो, खाटू से आयो श्याम

जिनके हिरदे में है सिया राम उनके निकट वसे श्री हनुमान सकल दुखो से देते निदान रक्शा स्वयम करे श्री