
सजल नयने रूप पाहू मी कैसे
पाहीन लोचने भरुनी, म्हणता भरुन लोचने आली, सजल नयने रूप पाहू मी कैसे , रंग तुझा कधी रे घननीळा ,

पाहीन लोचने भरुनी, म्हणता भरुन लोचने आली, सजल नयने रूप पाहू मी कैसे , रंग तुझा कधी रे घननीळा ,

सुन राजा अब त्याग दे झूठा मान घुमान दो दिन के सब ठाठ है दो दिन की ये शान भजले

जोगन बानी रे मैं तो सँवारे की , साँची लगन मन बाँवरे की, गिरधर मेरे मन में समाये, और न

बंसुरिया लेके आजा मेरे श्याम मुरलियां वाले तू आजा दिल में समा जा मेरे श्याम मुरलियां वाले, गर्मी का है

रुसेड़ा भक्तां न सांवरीयो मना रयों मनवार करे कान्हो नरसिलो एन्ठ रयों नरसी जी क डेरे जद पहुँचे श्याम धणी

मुरली बजाई श्याम पूर्णिमा की रात में, मुरली पुकारे गोपी गोपी नाम सुना तान रे, कोई गोपी काम कर्त शृंगार

नौकर रख लो चाकर रख लो जी, सेवक रखलो जी, नौकर रख लो जी सांवरिया मुझे चाकर रख लो जी

इति मतिरुपकल्पिता वितृष्णा भगवति सात्वतपुङ्गवे विभूम्नि । स्वसुखमुपगते क्वचिद्विहर्तुं प्रकृतिमुपेयुषि यद्भवप्रवाहः ॥ १ ॥ त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं रविकरगौरवराम्बरं दधाने । वपुरलककुलावृताननाब्जं

पट बंद करूँ नैनो के सपने में तू आये खोलू जो नैन खिड़कियां खड़ा सामने मुस्काये तेरे दर्शन को मेरे

श्री राधे वुषभानुजा,भक्तनि प्राणाधार, वृन्दावन विपिन विहारिणी प्रणवों बारम्बार, जैसो तैसो रावरौ कृष्ण प्रिया सुखधाम, चरण शरण निज दीजिये सुन्दर