
तान तकड़ी ते मन वन्जारा
तान तकड़ी ते मन वन्जारा, जी सोधा करी सोच सोच के, इस तान दे ने नौ दरवाजे, दसवा ठाकुर द्वारा

तान तकड़ी ते मन वन्जारा, जी सोधा करी सोच सोच के, इस तान दे ने नौ दरवाजे, दसवा ठाकुर द्वारा

तुम्हारे भवन में ज्योत जागे, ज्योत जागे मेरे पाप भागे अन्दन मंगल होये जी, भरमा जी वेद जपा है तेरे

चाहे हार हो चाहे जीत हो, तेरे चरणों में सतगुरु मेरी प्रीत हो, जन्म जनम से रटन लगाईं, अब तो

किरपा करते झोलियाँ भर ते हो खुश नसीब है के पाया आप को, खुशियां देते हो के गम हर लेते

गुरु जी तेरा मेरा प्यार कभी न बदले, मेरा ये व्यवहार कभी न बदले, गुरु जी तेरा मेरा प्यार कभी

गुरूजी मेरी बेटी को रखना सदा खुशहॉल, हाथ जोड़ के करा विनती पुरे करो सवाल, गुरूजी मेरी बेटी को रखना…

दिले में ना जाने सतगुरु क्या रंग भर दिया है, छोड़ेंगे अब ना दर तेरा इकरार कर लिया है, जिस

आजा सतगुरु प्यारिया उडीका मैनु तेरियां, कदो गल्ला होण गियां तेरिया ते मेरियाँ, हो आजा सतगुरु प्यारिया उडीका मैनु तेरियां,

औखे पेंडे ते कठिन चडाइया, सब कट जांदे जिहना गुरा नाल लाइयाँ साड़े गुरा ने जहाज बनाया, आ जाओ जिहने

हाथ जोड़ कर करू ये विनती कर गुरु जी स्वीकार, सब दुनिया में मौज करे और सुखी वसे परिवार, गुरु