
जय जय जय त्रिपुरारि
जयजय जय त्रिपुरारि जय त्रिलोचन जय दुख मोचन जय हे मंगलकारी जय जय जय त्रिपुरारि मुक्ति प्रदायक सरल तरंगे शीश

जयजय जय त्रिपुरारि जय त्रिलोचन जय दुख मोचन जय हे मंगलकारी जय जय जय त्रिपुरारि मुक्ति प्रदायक सरल तरंगे शीश

है आपके हाथों में,मेरी बिगड़ी बना देना भोले मेरी नैया को , भव पार लगा देना तुम शंख बजा करके

भोले नाथ बन के, विश्वनाथ बन के, चले आना, प्रभु जी चले आना ll तुम किसी भी, रूप में आना

हे गौरा माँ पार्वती, तेरा दूल्हा कैसे आया है ll दूल्हा कैसे आया है, तेरा दूल्हा कैसे आया है l

पंचाकक्षर मंत्र जग में निराला जो भी जपे पाए सुख का प्याला अंतर आत्मा में शिव है समाते मन में

भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में । मोहन तेरी गली में, कान्हा तेरी गली में ।। इक झलक पाने

राजे हिमाचल पारवती दा जदो सी व्याह रचाया पार्वती दे बूहे अगे शिव ने नाद वजाया, गोरा दा देखो लाडा

शिव का रूप सलोना भैरव देता सब सोगाते, दर्शन मात्र से पूरी होती सब की सारी मुरादे शिव का रूप

भोले बाबा कहा छुपे हो सुध क्यों न लेते हो आया शरण जो भोले बाबा वर तुम देते हो नील

जब मोज में भोला आये डमरू हो मगन भ्जाये खोले जटाए छाए घटाए भदरा बरसे जम जम भोले रे भोले