
शनि शिंगणापुर से मेरा भाग
शनि शिंगणापुर से मेरा भाग खुल गया रे, जादू हो गया रे कैसा जादू हो गया रे, बचपन से सुनता

शनि शिंगणापुर से मेरा भाग खुल गया रे, जादू हो गया रे कैसा जादू हो गया रे, बचपन से सुनता

शनि देवा पधारो मेरे घर मा, शनि देवा करू सेवा शनि देवा जी भगतो की लाज रखना, सूरज पिता है

माँ का नाम जपे जा हर पल लागे न कोई मोल रे, जय माता दी बोल रे तू जय माता

तू शक्ति है तू ज्वाला है, मेरी बिगड़ी बना दे आज, तुझे ही याद करता हु मुझे दर्शन दिखा दे

चरना च लगे मौजा लैने पाई आ दातिए, तेरिया रंगा च ऐसे रंगे पाए आ दातिए, किवे दसा बोल के

नहियो छड़ना नहियो छड़ना नहियो छड़ना, भावे झिडके तू मार सो सो वारी दुत्कार, असां तेरा द्वारा नहियो छडड़ना

सोहन महीने लगेया मेला मंगल करनी दा, जी करदा मैं वेखा मेला चिंतपूर्णी दा, साल पीछो जद माँ दे दर

दोहा: सदा पापी से पापी को तुम भव सिंदु तारी हो | कश्ती मझधार में नैया को भी पल में

मेरे घर में पधारो जगदम्बे भवानी, पावन मेरा घर द्वार करो, करता हु अभिनन्दन मैया वंधन स्वीकार करो, जब जाना

डगमग डगमग ढोले भरोसा उस तो पहला आजा, माँ अम्बे जगदम्बे तू मैनु दर्श दिखा जा, अरशा तो आउंदी मइयां