
गूंज रहे जय कारे माँ देया मंदिरा ते
भजदे ढोल नगाड़े माँ देया मंदिरा ते, नच्दे भगत प्यारे माँ देया मंदिरा ते, गूंज रहे जय कारे माँ देया

भजदे ढोल नगाड़े माँ देया मंदिरा ते, नच्दे भगत प्यारे माँ देया मंदिरा ते, गूंज रहे जय कारे माँ देया

चंडी माँ तेरे चरना दी जे मैं प्याल होवा चरण तेरे मैं धोये धोये पीवा माँ चंडी तेरे चरनी जीवा,

तुम्हारी दया अम्बे माँ हो गई, जागरण की रात शुरू हो गई, संकट हमारे किरपा कर मिटा दो, अमर प्रेम

मंगणें दी पैंदी कदे लोड़ न, ख़ैर साडी झोली विच पाई जांदी ए । जिने खुल्ले अज साडे खर्चे, ओना

शेर पे होक सवार हो मैया शेरावाली आई है, ऊचे पर्वत भवन निराला उस पे माँ का रूप है प्यारा,

माँ सरस्वती वंदना तर्ज : मेरे देश प्रेमीओं आपस में प्रेम करो सरगम का ज्ञान हमें दो, स्वर ताल से

सारे रल मिल के बोलो जैकारा माई दा जेहडा प्यार नाल बोलो ओह प्यारा माई दा झूम झूम के हर

फुला नाल सजेया दरबार चिंतपूर्णी दा, मेला बड़ा भरे हर साल चिंतपूर्णी दा, जय माता दी सब नु भुला के

जिसका मुझे था इंतज़ार, जिसके लिए दिल था बेक़रार वो घड़ी आ गई-आ गई, आज मैया के दर पे मुझे

सरस्वती माता का प्राता ध्यान धरे, फिर हम अंतर् मन में अपने ज्ञान भरे. कला विध्या सुर देने वाली देवी