
राजा भरथरी से अरज करे
नगर उज्जैन के राजा भरथरी हो घोड़े असवार |एक दिन राजा दूर जंगल में खेलन गया शिकार | विछड गए

नगर उज्जैन के राजा भरथरी हो घोड़े असवार |एक दिन राजा दूर जंगल में खेलन गया शिकार | विछड गए

नाम जपन क्यों छोड़ दियां क्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ा सत्ये वचन क्यों छोड़ दियां, झूठे जग में दिल

ओ भैया प्यारे रोये राखी का धागा ओ भैया कहा है तू आजा , ये बेहना याद करे आजा ओ

प्रभु हम पे कृपा करना, प्रभु हम पे दया करना । बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

दीन बंधू दीनानाथ मोरी सुध लीजिये दीनो के दयालु दाता मोपे दया कीजिये भाई नहीं बन्धु नाही कुटुंब कबीलों नाही

तेरी बातें ही सुनाने आये दोस्त भी दिल ही दुखाने आये फूल खिलते हैं तो हम सोचते हैं तेरे आने

इंतज़ाम कर दिया है तुमने रोज़ी रोटी का विश्वकर्मा जी से नक्शा पास करा दे कोठी का बाबा सुनलो ऐसी

हे प्रभु मुझे बता दो चरणों में कैसे आऊँ हे प्रभु मुझे बता दो, चरणों में कैसे आऊँ, माया के

साथी रे भूल ना जाना मेरा प्यार मेरी वफ़ा का ऐ मेरे हमदम कर लेना ऐतबार साथी रे भूल ना

ओ माँ ओ माँ ओ माँ प्यारी मा……….. तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है ओ प्यारी प्यारी है