
तू रोम रोम में मेरे
तू रोम रोम में मेरे , सांसो में समाया ओ बाबोसा में तेरे , ख्वाबो में खोया रे में तेरी

तू रोम रोम में मेरे , सांसो में समाया ओ बाबोसा में तेरे , ख्वाबो में खोया रे में तेरी

प्रगटेयो प्रभु वाल्मीकि भगवान श्रृष्टि रचैया रमन रचैयाँ करुना के सागर प्रभु दया वान प्रगटेयो प्रभु वाल्मीकि भगवान प्रभु श्री

तर्ज – दिल से बंधी एक डोर जो ….. दीपो से सजे घर द्वार , दीपावली आई है हाँ आई

चाँद चमके सदा रौशनी के लिए मेरी पूजा है मेरे पति के लिए साल का इक दिन मेरा अपना है

हो सकल जगत के स्वामी सिरजन हारे धर्म धुरी न धारण सेवक संता न तारन आओ धरती पे ले अवतार

नाजुक सी है कोमल सी है घर का उजाला है कुम कुम है हर घर का तुलसी के माना है

मुझको प्रभु ले के जग में तू आया तेरा शुक्रिया है ,तेरा शुक्रिया है माता पिता का दिया प्यार मुझको

(तर्ज – बाबुल का ये घर गोरी……) दादा तेरे भगतो को, तेरा ही सहारा है, तेरे बिना दुनिया में, कहो

हे योगेशवर हे परमेश्वर ऐसी किरपा प्रभु हम सब पे कर सत्य मार्ग के बन कर सादक बड़ते रहे सदा

जगत में कोई ना परमानेंट, तेल चमेली या फिर साबुन, तेल चमेली चन्दन साबुन चाहे लगा लो सेंट, जगत में