
रोटी खा ले ठाकरा
हथ जोड़ के बेह गया हूँ मैं बस एह अरदासा करदा रोटी खा लै ठाकुरा वे मियन मिनता तेरिया करदा

हथ जोड़ के बेह गया हूँ मैं बस एह अरदासा करदा रोटी खा लै ठाकुरा वे मियन मिनता तेरिया करदा

देव धणी को मन्दिर प्यारो , मालासेरी गाँव जी, साडू मां का लाल थांको , जग में मोटो नाम जी.

मन तड़पत हरि दरशन को आज ॥ मन तड़पत हरि दरशन को आज ॥ मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज

कहां छुपा बैठा है अब तक वह सच्चा इंसान, खोजते जिसे स्वयं भगवान, जिसने रूखा सूखा खाया , पर न

चलो जाके दर्शन पाइये सुट्टी तकदीर जगाइये, ओहदे मुख ते नूरी लाही है मेरा वेख के मन हरषाया, इक निक्का

पौनाहारी मेरे साथ है, हमको डरने की क्या बात है, इनके रहते कोई कुछ कहे, बोलो किस की ये औकात

पौणाहारी मीठा मीठा चिमटा वजा, तेरी भगति में खो जाऊ, दुनिया को मन से बिसराऊ, मैं भी तेरा लाल कहाऊ

बल्ले बल्ले बई सिद्ध जोगी पौनाहारी दे, संग चलाया जैकारा लाउंदा सिद्ध जोगी पौनाहारी दे , बल्ले बल्ले बई सिद्ध

कदे एह दर भटका कदे ओह दर भटका, योगी ला चरना दे नाल, दुनिया नु दुखड़े मैं की सुनावा, जी

शाहतलाई विच बाबा जी दा डेरा, सोने दी गुफा विच बैठा जोगी मेरा, आज रज रज दर्शन पाओ भगतो मेरे