
जैसे पर्वत से झरने झर झर झर झरते आये
जैसे पर्वत से झरने झर झर झर झरते आये मीठी आवाज सुनाये हम भी तो गुन गुनाये हरी का नाम
जैसे पर्वत से झरने झर झर झर झरते आये मीठी आवाज सुनाये हम भी तो गुन गुनाये हरी का नाम
राम आये हैं मेरे भगवन आये हैं स्वागत की कर लो तैयारी अवध में राम आये हैं राम आये हैं
लक्षमण और सीता के संग वन को जाते राम | दर्शन प्यासी भीलडी जोत रही बाट ॥ चित्रकूट के घाट
चली राम नाम की गाड़ी , चली राम नाम की गाड़ी चार ड्राइवर एक सवारी पैदल दुनिया सारी नेकी बदी
नहीं चलाओ बाण व्यंग के ऐह विभीषण ताना ना सेह पाऊं, क्यों तोड़ी है यह माला, तुझे ए लंकापति बतलाऊं
राम भक्त ले चला रे राम की निशानी, प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि सादर भारत शीश धरी लीन्ही राम भक्त
नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो चरन हो राघव के, जहा मेरा ठिकाना हो। नगरी हो अयोध्या सी,
मुझे अपनी शरण में ले लो राम ले लो राम द्वार तिहारे आन पड़ा हूं मेरी खबरीआ ले लो राम
गली गली ढूंढा, वन वन ढूंढा, कहा कहा ढूंढा राम, सब जग ढूंढा मैंने, मन नहीं ढूंढा, जहा मिला मेरा
राम को देख कर के जनक नंदिनी, बाग़ में वो खड़ी की खड़ी रह गयी । राम देखे सिया को